भगवान राम जी की पांच वर्ष वाली प्रतिमा ही क्यों चुनी गई? आखिर क्या है वजह

अयोध्या में इस वक्त धूम मची हुई है सभी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जिस दिन आखिर प्राण प्रतिष्ठा होगी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी अपने सिंहासन पर विराजेंगे। पर एक ऐसी बात है जो शायद कई सारे लोगों के मन में उठी होगी आखिर मंदिर में उनके बाल स्वरूप को ही क्यों विराजमान किया जाएगा। इसमें कुछ लोगों का तो सामान्य सुझाव है कि भगवान है श्री राम जी का जो पहले बचपन में बाल स्वरूप था जिसको देखकर माताओं के अंदर ममता भाव जाग्रत होता था ठीक इस विचार को मध्यनजर रखते हुए इसका फैसला किया गया है लेकिन यहां विस्तार से नहीं है हम इसके बारे में नीचे जानने का प्रयास करते हैं।

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राम की पांच वर्ष वाली प्रतिमा ही क्यों चुनी गई?

22 तारीख को सभी भारतवासी दिवाली मनाएंगे पूरे भारत देश में खुशी की लहर होगी किंतु उससे पहले 17 जनवरी को प्रभु की चांदी की एक प्रतीकात्मक प्रतिमा को मंदिर भ्रमण कराया गया है। वहीं अगले दिन यानी की 18 जनवरी गुरुवार के दिन प्रभु की मूर्ति को आसन पर विराजमान करके पूजा कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। क्या बात आती है कि जो मुख्य प्रतिमा होगी उसमें भगवान श्री राम जी की 5 वर्ष की बाल स्वरूप मूर्ति का चयन ही किया गया है। यहां पर एक प्रश्न खड़ा होता है कि 5 वर्ष की बाल रूप में राम जी की मूर्ति का ही चयन क्यों किया गया।

दोस्तों यहां बात तो हम सब जानते हैं कि अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की जन्म भूमि है वहां पर श्री राम जी का जन्म हुआ था जिस वजह से मंदिर में भी बाल स्वरूप श्री राम जी के दर्शन होंगे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई सारे अधिकारियों कि यह राय है कि मंदिर में प्रभु का वही बाल रूप होना चाहिए जिसे देखकर आज भी आधुनिक जमाने में माता के अंदर ममता का भाव जागे।
कुछ लोग यह भी इच्छा रखते हैं कि भगवान राम पूर्ण पुरुष के रूप में विराजमान ना हो। जिन्हें देखकर सभी आज के युवाओं में वीरता का भाव जागृत हो और वह राष्ट्र समाज में धर्म रक्षा के लिए और भी प्रेरित हो।
किंतु अंत में सभी की राय यही है कि मंदिर में श्री राम जी के 5 वर्ष बाल स्वरूप मूर्ति एक बच्चे के समान कोमलता उनके मुख पर होगी। जिसे देखकर सभी माता में ममता का भाव उत्पन्न होगा तो वही पुरुषों में भी भगवान राम जी के बाल स्वरूप को देखकर उनके पूर्ण रूप का आभास होगा।
जानकारी के अनुसार यह सुनने में आ रहा है कि यह मूर्ति बहुत ही सुंदर है जिसे देखकर राम भक्तों के अंदर और भी भक्ति का भाव जागृत होगा। 

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