मोतिहारी से अयोध्या जा रहा है-17 किलो सोने का घोड़ा !

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की जन्म भूमि अयोध्या नगरी में अभी शीघ्र से प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी चल रही है ओर इसी बीच मोतिहारी से अयोध्या अश्वमेध यज्ञ का 17 kg सोने का राम जी का घोड़े की कुछ जानकारियां सामने आई है। यहां आपको विश्वास नहीं होगा कि घोड़े को अयोध्या नगरी भेजने के लिए स्वयं श्री राम जी ने स्वप्न में निर्देश दिया। कलयुग में सन 2022 में भी अश्वमेध यज्ञ किया गया था। अश्वमेध यज्ञ घोड़ा बहुत ही अद्भुत है इसकी कई सारी विशेषताएं हैं। दोस्तों आपको आश्चर्य जरूर होगा कि आखिर क्या विशेषताएं है इस घोड़े में जो इसको मोतिहारी से अयोध्या ले जाया जाएगा। चलिए इसके बारे में नीचे विस्तार से पूरा सच जानते हैं?

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17 KG सोने का राम जी का घोड़ा-

यह घोड़ा सोने से प्लेटेड है। इस घोड़े के सिर पर एक सोने का पूरा फूल लगा हुआ है। इसका वजन 17 किलो है। दोस्तों आपको बता दे कि त्रेता युग में भगवान श्री राम जी ने अश्वमेध यज्ञ किया था तो वहीं कलयुग में भी अश्वमेध यज्ञ भारत के मोतिहारी के समाज सेवा एवं उद्योगपति डॉ. शंभू नाथ सीकरिया जी ने सन 2022 में अश्वमेध यज्ञ कराया था। यहां मोतिहारी से जो अयोध्या सोने का राम जी का घोड़ा जाने की बात है। यहां अश्वमेध यज्ञ का ही घोड़ा है। इसको बनवाने के पीछे डॉ. शंभू नाथ सिकरिया जी का हाथ रहा है। इन्होंने इस घोड़े को गोल्ड प्लेटेड से तैयार कराया है। इसको बनाने में करीबन 11 महीने का समय लगा हुआ है। सपने में भगवान ने उनको निर्देश दिया कि राम जी का घोड़ा राम जी के पास ही भेजो। शंभू नाथ जी की उम्मीद व प्रयास तो यही है कि इस घोड़े को अयोध्या भेजा जाए। दोस्तों बता दे कि जो अश्वमेध यज्ञ करता है वहां कोई मामूली या यूं कहे की साधारण इंसान नहीं होता है।
जो व्यक्ति परिपक्व हो या जिसको भगवान ने सब कुछ सर्वत्र प्रदान किया हो। वही व्यक्ति अश्वमेध यज्ञ करता है। आखिर क्यों शंभू नाथ जी ने अश्वमेध यज्ञ कराया था तो हम इसके पीछे की वजह नीचे विस्तार से जानते हैं।

 

आखिर शंभू नाथ जी ने अश्वमेध यज्ञ क्यों कराया?

जब इन्होंने यानी कि शंभू नाथ जी ने अश्वमेध यज्ञ कराया तब बहुत लोगों ने इसका विरोध किया। लोगों ने कहा कि केवल जो चक्रवर्ती सम्राट होते हैं वही यह यज्ञ को पूर्ण कर सकते हैं। जब प्राचीन समय में अश्वमेघ यज्ञ होता था तो इसके पीछे दो कारण होते थे।
पहला कारण- पाप से छुटकारा पाने के लिए।
मतलब राम जी ने भी रावण की हत्या से जो पाप लगा था उसके निवारण के लिए अश्वमेध यज्ञ किया था।
दूसरा कारण- अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा जितने भी क्षेत्र में घूमता है वह क्षेत्र उसमें सम्मिलित हो जाता है।

लेकिन इन्होंने बड़े ही विशेष प्रयोजन से अश्वमेध यज्ञ कराया ना तो इनके अश्वमेध यज्ञ में कोई पाप जैसी बात थी ना ही कोई क्षेत्र की बात थी। इनके अश्वमेध यज्ञ करने के पीछे बहुत बड़ा कारण था वहां कोरोना से संबंधित है। कोरोना वायरस को दूर भगाने एवं विश्व कल्याण के लिए इन्होंने अश्वमेध यज्ञ कराया था। इस घोड़े का सर झुका हुआ है जिससे यहां साबित होता है कि है शांति का प्रतीक है। अब इनकी केवल एक ही इच्छा है कि इस घोड़े को अयोध्या भेजा जाए पूर्ण सिक्योरिटी के साथ।

22 जनवरी को भगवान श्री राम जी के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम रखा गया है। अब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की नगरी अयोध्या पर पूरे देश क्या पूरे विश्व की नजर टिकी हुई है। आखिर 22 जनवरी को कैसा माहौल होने वाला है 22 जनवरी को भगवान अपनी अयोध्या नगरी में पधारेंगे।

 

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