रामलला के गर्भगृह का मुख्य द्वार सोने से बनाया गया-लगभग 14 ऐसे सोने की दरवाजे ओर लगने की आशंका-

अयोध्या बिल्कुल आज के आधुनिक जमाने में त्रेता युग की तरह सजी है और सभी को 22 तारीख का बेसब्री से इंतजार है। अयोध्या से एक बड़ी खबर आ रही है कि जो रामलला के गर्भगृह का मेन दरवाजा है उसमें क्या विशेष है इतना ही नहीं एक जानकारी और सामने निकल कर आ रहे हैं कि श्री राम का अभिषेक करेंगे सूर्य देव आपके मन में प्रश्न तो आ रहा होगा दोस्तों की क्या यहां सत्य है तो चलिए दोस्तों आगे इसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं-

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रामलला के गर्भगृह का मुख्य द्वार सोने से बनाया गया-

रामलला के गर्भगृह का जो मुख्य दरवाजा है वहां सोने से बना हुआ है। राम भक्तों को जैसे ही इसके बारे में पता चला वह खुशी से झूठ है। उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। इसको मंगलवार को स्थापित किया गया है। इसकी कीमत लगभग करोड़ों में बताई जा रही हैं।

लगभग 14 ऐसे सोने की दरवाजे ओर लगने की आशंका-

बात अभी यही नहीं रुकती है दोस्तों अभी लगभग 14 ऐसे सोने की दरवाजे ओर लगने अभी बाकी है। गर्भ ग्रह का जो मुख्य द्वार है इसकी कुछ विशेषताएं भी है। इसको खूबसूरत नकाशियो से सभी तराशा गया है। सुनने में यहां आ रहा है कि भूतल पर अभी 14 दरवाजे ओर लगेंगे।
सभी कारीगरों को प्रयास है जल्द से जल्द कार्य को खत्म करना। आज पहले दरवाजे को व्यवस्थित रूप से लगा दिया है। इन दरवाजों को महाराष्ट्र के साबुन से तैयार किया गया है। इसके पश्चात सोना जड़ित इनको बनाया गया है। इनमें कई सारी आकृतियों को बनाया गया है जैसे- हाथी, विष्णुजी, स्वागत की स्थिति में देवी को भी चित्रांकित किया गया है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के समय में यूपी में विशेष रूप से सार्वजनिक अवकाश, शराब प्रतिबंध घोषित हो चुका है।

 

क्या सच में श्री राम जी का अभिषेक करेंगे सूर्य देव?

कई सारे सिविल इंजीनियरिंग का योगदान तो रहा ही है इसके अलावा भी पूरे वास्तु और आध्यात्म के गुण धर्मों को पिरोकर तैयार का कार्य पूरा किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कुछ खास जानकारी को बताया है कि प्रभु श्रीराम की मूर्ति को इस तरह से बनाया गया है कि हर साल रामनवमी के दिन भगवान सूर्य स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का अभिषेक करेंगे। जानकारी यहां भी निकल कर आ रही है कि जो भारत के प्रख्यात वैज्ञानिकों है उनके अनुसार मूर्ति की ऊंचाई को ऐसा बनाया गया है कि प्रत्येक साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को दोपहर के समय करीबन 12 बजे सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ेगी। तीन कारीगरों के द्वारा मूर्तियां भिन्न-भिन्न बनाई गई है इनमें से एक को खास रूप से चुना गया है मतलब भगवान श्री राम के हाव भाव, बाल रूप के द्वारा चुना गया है।

जिस मूर्ति को चुना है उसकी पूरी लंबाई 51 इंच है। वजन की बात करें तो मैक्सिमम 1.5 टन मूर्ति को बाल रूप में स्थापित किया जाएगा। मूर्ति के ऊपर मुकुट, मस्तक इत्यादि को भी बहुत सूक्ष्म रूप से समय देकर तैयार किया गया है। यहां राम मंदिर बहुत ही अद्भुत विशाल होने वाला है क्योंकि बीते 300 सालों में कोई भी ऐसा मंदिर निर्माण नहीं हुआ है। अयोध्या नगरी में राम मंदिर के नीचे 21 फीट लगाया गया ग्रेनाइट इसमें लोहे का 1 ग्राम भी उपयोग नहीं किया गया है। मतलब जमीन के नीचे लोहे का उपयोग बिलकुल भी नहीं किया गया है। जिस तकनीक से मंदिर तैयार किया गया है उससे यहां साबित होगा कि मंदिर कई पीढ़ी तक जैसे का जैसा ही बना रहेगा।

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