Chandrayaan-3: आखिर कब लैंड करेगा चांद पर, चंद्रयान-3 मिशन की संपूर्ण जानकारियां आइये जानते हैं?

Chandrayaan-3 : आखिर कब लैंड करेगा चांद पर, चंद्रयान-3 मिशन की संपूर्ण जानकारियां आइये जानते हैं –

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Chandrayaan-3 :

भारत निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर हो रहा है। आज निरंतर हमारा देश बहुत आगे बढ़ चुका है और भविष्य में भी ऐसे ही आगे बढ़ता रहेगा। दिनो दिन सभी युवा कुछ नया सीख रहे हैं कुछ नया अविष्कार कर रहे हैं कुछ नई सोच लेकर आ रहे हैं।
अभी वर्तमान समय में Chandrayaan-3 जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में चल रही है। यहां एक साक्षात उदाहरण है जिसने यहां तो बता दिया कि भारत कितना आगे बढ़ चुका है और भारत ने कितनी तरक्की कर ली है। भारत कभी भी हार नहीं मान सकता ऐसे ही भारत निरंतर नए नए कदम उठाएगा और देश को विश्वास दिलाएगा कि हमारा देश भी किसी से कम नहीं है।
Chandrayaan-3 जिसने भारत में ही नहीं पूरे दुनिया में तहलका मचा दिया है। इस जानकारियों को जानकर सभी देशवासी काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। आखिर भारत भी इतिहास रचने के काबिल हो चुका है।
चलिए अब बिना देर करें सभी जानकारियां नीचे विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
तो आइए दोस्तों जानते हैं-

 

Chandrayaan-3 लॉन्च कब किया?

चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को लांच किया गया है। इसको आंध्र प्रदेश, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर के करीबन 2:35 बजे विदा किया गया है।
यहां दिन सभी भारत वासियों के लिए बहुत ही गर्व का दिन था परंतु सूत्रों के अनुसार चंद्रयान-3 को चांद पर लैंडिंग करने में लगभग 45 दिन लग जाएंगे चंद्रयान का जो रोबोटिक डिवाइस है। वहां 24 अगस्त तक चांद के उस भाग पर पहुंच सकता है। जहां तक अभी भी किसी भी देश का अभियान नहीं पहुंचा है। इस भाग को “शेकलन क्रेटर” कहा जाता है।

 

Chandrayaan-3 में कितना बजट लगा?

चंद्रयान-3 इसका शुरुआती बजट 600 करोड़ रुपए का लगाया गया था परंतु अंतिम बजट 615 करोड़ रुपए का हुआ। टोटल 615 करोड़ रुपए का बजट चंद्रयान-3 में लगा।

चांद का दक्षिणी ध्रुव शेकलन क्रेटर
चांद का दक्षिणी ध्रुव शेकलन क्रेटर

चांद का दक्षिणी ध्रुव शेकलन क्रेटर-

शेकलन क्रेटर यहां चांद का दक्षिणी ध्रुव है। यहां ऐसा भाग है जिस पर बहुत सालों से सूर्य की किरणें पहुंची ही नहीं और यहां का तापमान बहुत ही कम है लगभग -267 डिग्री F में रहता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस जगह पर हाइड्रोजन की बहुत अधिक मात्रा है। इसी वजह से यहां पर पानी मौजूद हो सकता है तथा खनिज के होने की भी आशंका जताई जा रही है। यहां भाग काफी रहस्यमयी है और इस भाग पर अंधेरा बहुत ही विशाल है। इसी कोशिश को अंजाम देने के लिए भारत ने चंद्रयान-3 को लांच किया। इस मिशन के मुताबिक भारत इतिहास में अपना नाम दर्ज कर देगा और यहां भी सिद्ध हो जाएगा कि भारत कभी भी हार नहीं मान सकता है।

 

चंद्रयान-2 :

22 जुलाई, 2019 में चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजा गया था परंतु यहां किसी हार्ड लैंडिंग की समस्या के कारण अपने मिशन में सफल नहीं हुआ था‌। परंतु इन गलतियों से कुछ सीख कर चंद्रयान-3 वर्जन को लांच किया गया।

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